मध्यप्रदेश के भोजपुर मंदिर का रहस्य 

by Divyansh Raghuwanshi
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 23 कि.मी. दूर पहाड़ी पर शिव मंदिर है, जो कि अधूरा बना हुआ है। देखने से ही प्रतीत होता है कि मंदिर का शिखर नहीं है, मंदिर अधूरा है। यदि शिव मंदिर का निर्माण पूर्ण हो गया होता तो यह उस समय का भारत का सबसे बड़ा, प्राचीन शिव मंदिर होता। इस मंदिर को पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है। सीढ़ियों से ऊपर जाकर 275 फ़िट लंबा 80 फ़िटचौड़ा प्लेटफार्म है।

मन्दिर का गर्भगृह 

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Bhojpur Mandir Sanctum

मंदिर के गर्भ गृह में विशाल व भव्य शिवलिंग है।

यह चमकीला शिवलिंग भारत देश का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। शिवजी के पूजन के लिए वहां के पुजारी जी को सीढ़ियों का प्रयोग करना पड़ता है। मंदिर चार स्तंभ पर बना हुआ है। ये बहुत ही बड़े व भारी है। मंदिर के पत्थरों पर शिव जी के चित्र को उकेरा गया है, जो कि बहुत ही बारीकी से किया गया है। उस समय इतनी बारीक़ कलाकारी सराहनीय है।

राजा भोज द्वारा हुआ निर्माण 

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Bhojpur Mandir Built by Raja Bhoj

इस मंदिर को बनाने का बेड़ा उठाया था परमार वंश के राजा भोज ने। 11वीं शताब्दी के राज्य में राजा भोज ने कई मूर्तियां व मंदिरों का निर्माण करवाया था। कहा जाता है प्राचीन समय में बड़े बड़े मंदिर बनाने के लिए पहाड़ पर ढलान तैयार की जाती थी उस पर घोड़े, हाथी द्वारा सामान व पत्थर ले जाए जाते थे। जब मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाता था तो इन ढलानों को मिटा दिया जाता था। 

ऐसी ही ढलान भोजपुर के शिव मंदिर के पास है। ये इस बात का संकेत देती है, कि मंदिर का निर्माण अधूरा है। यहाँ मन्दिर का निर्माण इसलिये कराया जा रहा था क्योंकि यहाँ की चट्टानों के पत्थर बहुत ही चमकीले, बड़े बड़े थे। मन्दिर की डिज़ाइन इन्हें तराश कर बनाई गई और इन्हीं पत्थरो का प्रयोग मन्दिर निर्माण में किया गया था। मन्दिर से 7 कि.मी. दूर एक ऐसी जगह है, जहां प्राचीन मूर्तियां वैसे ही है जैसे कि भोजपुर मंदिर में। माना जाता है, कि यह शिव मंदिर से जुड़ा कोई रहस्य ही है। कहा जाता है यहां का नक्शा किसी कागज या लकड़ी पर नहीं बनाया गया बल्कि पत्थर पर बना हुआ है जो आज भी मंदिर के पास मौजूद है और उस समय बिना टेक्नोलॉजी वाले समय में भी ये अनोखी कलाकारी का नमूना है।

मान्यताएं 

ऐसा माना जाता है, कि एक समय राजा भोज की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। तब उन्हें कहा गया था कि उन्हें अलग-अलग जगह की नदियों का पानी पीना है, तो वह ठीक हो जाएंगे। तभी राजा भोज ने एक नदी पर बांध बनाया जिसमें बहुत सारी नदियों का पानी लाया गया और उसका पानी पीकर राजा भोज ठीक हो गए। तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे यहां पर एक बड़ा और भव्य मंदिर बनाएंगे परंतु किसी कारण से इस मंदिर का निर्माण अधूरा ही रह गया है। ऐसा माना जाता है, कि शायद किसी प्राकृतिक आपदा या फिर युद्ध आ जाने के कारण मंदिर का निर्माण कार्य वहीं छोड़ दिया गया। इस मंदिर के शिवलिंग को एक रात में ही बनाया गया था। निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने की वजह आज तक किसी को मालूम नहीं है सभी अनुमान लगाए जाते हैं परन्तु सच आज भी एक रहस्य है।

 

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