“आज की कैद अच्छी है, कल की आजादी के लिए, आज की थोड़ी सी आजादी, काफी है कायनात की बर्बादी के लिए ,परिवार के साथ रहें, स्वस्थ रहें….!!!”
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बैलगाड़ी मे चलते थे बैल सा जीवन जीते थे, घास फूस खाकर भी निरोगी काया पाते थे फिर मोटर बनाई, सुख सुविधा पायी हर चीज मे तेजी लायी Food भी …
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Corona से पूछा मैंने तू क्यूँ आया है, क्यूँ इतनी बर्बादी लाया है Corona रोकर बोला ये तो नियति का साया है, जो बोया उसीका फल पाया है चहुँ ओर, …
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जिंदगी और मौत इक सफर के दो छोर जिंदगी चलती रहती अनवरत मौत की ओर कौन सा रस्ता, कौन सी मंजिल ढूंढते रहते हैं हम जिंदगी भर जीवन भी उसका …
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मुझे मेरे हिन्दू होने पर नाज है तुझे तेरे मुस्लिम होने पर नाज है लेकिन राम मेरा भी मुझसे नाराज है और खुदा तेरा भी तुझसे नाराज है पाप मैंने …
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वो कहता है कि थाली बजाओ, भाई लोग परातें फोड़ देते हैं। वो कहता है दिए जलाओ, भाई लोग बम पटाखे फोड़ देते हैं। ये परम्परा अनादि काल से चली …
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एक मुद्दत से आरज़ू थी फुरसत की … मिली , तो इस शर्त पे कि किसी से ना मिलो ..!! हम कहते थे मरने तक की फुर्सत नहीं है आज …
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एक मुद्दत से आरज़ू थी फुरसत की … मिली , तो इस शर्त पे कि किसी से ना मिलो ..!! हम कहते थे मरने तक की फुर्सत नहीं है आज …
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Bashir Badr never knew that his lines will one day so aptly describe the corona virus scenario of lockdown and social distancing
by SamacharHubयूँ ही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले …