पहले हमारे आंगन में ची-ची करने वाले Bird अब आने वाली पीढ़ी के लिए अनजान सी हो गई है क्योंकि आज पक्षी धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं।
पहले घर आंगन में इतना शोर सुनाई देता था कि पक्षियों की चहचहाहट से सुबह होती थी तथा आसमान में इन चिड़ियों का झुंड दिखाई देता था। पहले बच्चे इनकी आवाज सुनकर तथा बचपन में पक्षियों को देखकर बड़े होते थे, अब स्थिति बदल गई है और बदलते पर्यावरण के साथ गौरैया संकट में आ गया और इनका अस्तित्व संकट में आ गया है, और कहीं कहीं तो अब यह बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती।
20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग Bird को बचाने के प्रति जागरूक हो। पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाली दशक में गौरैया आबादी में 60 से 80 फ़ीसदी तक कमी आ गई है। सुनील विश्वकर्मा ने कहा है कि, जब यह चिड़िया जब अपने बच्चों को दाना खिलाया करती थी तो हम तथा बच्चे उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न होते थे लेकिन अब तो इनके दर्शन भी मुश्किल से होते हैं और अब यह भी विलुप्त की कगार में आ चुके हैं।
Bird: उचित स्थानों की कमी

Lack of proper places
आजकल लोग खेतों से लेकर अपने गमलों के पेड़-पौधों में भी रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं। इससे ना तो पौधों को कीड़े लगते हैं और ना ही इस पक्षी का समुचित भोजन बन पाता है। भोजन न मिल पाने के कारण गौरैया सहित समस्त पक्षी प्रजाति आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई हैं। आवास में कमी, आहार की कमी और मोबाइल फोन और मोबाइल टावरों से निकलने वाली अत्यंत सूक्ष्म तरंगों से गौरैया तथा विभिन्न पक्षियों का अस्तित्व संकट में आ गया है। इसलिए आज लोगों में गौरैया तथा पक्षियों के प्रति जागरूकता लाना अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि आजकल कई बार लोग अपने घरों से पक्षियों के घर को बसने से पहले ही उजाड़ देते हैं। कई बार किसी पेड़ की टहनी या शाखा में अटक जाने से पक्षियों की जान चली जाती है। आजकल के बच्चे कई बार अपने मनोरंजन के लिए गौरैया के बच्चों को पकड़कर उनके पंखों को रंग देते हैं। इससे गौरैया को उड़ने में दिक्कत होती है और उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने लगता है।
आज का संदेश
आओ हम गौरैया से सीखे, समय के साथ अपने काम करना, सोना और उठना। गौरैया की एक खास बात होती है कि, वह 6:00 बजे अपने घोंसले में चली जाती है, सुबह 5:00 बजे अपने खाने की तलाश में उठकर निकल जाती है। उसका दिन भर दाना चुगने और नया घोंसला बनाने में जाता है।
किसानों की साथी

Good Farmers Partner
गौरैया अनाज दाने तो खाती है, इसके साथ खरपतवार भी चुगती है। यह फूल, पेड़, अनाज और पौधों के कीड़े खाती है। यही कारण बताया गया है कि यह किसानों की अच्छी दोस्त हैं। प्राणी शास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ रीता भंडारी कहती हैं कि, गौरैया एकमात्र ऐसा Bird माना जाता है जो विश्व में सभी जगह पाया जाता है। हर तरह आवास तथा वातावरण में रहने वाला पक्षी है। जरूरत पड़ने पर पानी में भी तैर सकती हैं और मनुष्य के साथ उसकी अच्छी बॉन्डिंग रहती है। इस कारण से वे मनुष्य के आसपास हमेशा दिखाई देते हैं।
