जिंदगी और मौत इक सफर के दो छोर जिंदगी चलती रहती अनवरत मौत की ओर कौन सा रस्ता, कौन सी मंजिल ढूंढते रहते हैं हम जिंदगी भर जीवन भी उसका …
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मुझे मेरे हिन्दू होने पर नाज है तुझे तेरे मुस्लिम होने पर नाज है लेकिन राम मेरा भी मुझसे नाराज है और खुदा तेरा भी तुझसे नाराज है पाप मैंने …
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जो कह दिया वह शब्द थे, जो नहीं कह सके वह अनुभूति थी और जो कहना है, फिर भी नहीं कह सकते वह मर्यादा है।। जिन्दगी का क्या है? आकर …