आज हम जानेंगे भारतनाट्यम आखिर क्यों भारत में इतना प्रसिद्ध नृत्य है? भारतनाट्यम भारत के विभिन्न नृत्यों में से अत्यंत प्राचीन नृत्य है, जोकि बहुत ही प्रचलित नृत्य है। इस प्रचलित नृत्य को “चधिर अटम” नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा एकल नृत्य है, जो विशेषकर महिलाओं के द्वारा किया जाता है। यह नृत्य दक्षिण भारत की प्राचीनतम संस्कृति को प्रस्तुत करता है। भारतनाट्यम मुख्यतः तमिल राज्य का प्राचीन नृत्य माना जाता है। इस नृत्य को भारतनाट्यम नाम आधुनिक युग में दिया गया नाम है। इस को प्राचीन नृत्य इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि अति प्राचीन मंदिरों में इस नृत्य को करते हुए निर्मित मूर्तियों को देखा गया है जिससे यह साबित होता है, कि यह अति प्राचीन नृत्य है। आज हम इस नृत्य को इस लेख के द्वारा इसके बारे में जानेंगे।
भारतनाट्यम नृत्य का इतिहास
भरतनाट्यम नृत्य की शुरुआत को ऐसा माना जाता है, की इसकी शुरुआत तमिलनाडु के प्रचलित लोगों द्वारा की गई। प्रारंभिक में इस नृत्य को ज्यादा प्रचलन में ना होने के कारण बढ़ावा ना मिल सका परंतु आधुनिक युग में इसको बढ़ावा दिया गया है। इस नृत्य को बनाते समय बहुत ही बारीकी से ध्यान दिया गया था। दो भागों में इसको विभक्त किया गया है- नृत्य और अभिनय। नृत्य में अभिनय को विशेष महत्व प्रदान किया जाता है और नृत्य को शारीरिक प्रतिक्रियाओं द्वारा किया जाता है। इन शारीरिक प्रतिक्रियाओं को तीन भागों में विभाजित किया है- समभंग, अभंग, त्रिभंग।
भारतनाट्यम के भाग
भारतनाट्यम के कुछ भाग हैं, जो निम्न प्रकार हैं-
आलारिप्पू-
भारतनाट्यम के भाग आलारिप्पू अर्थ यह है कि “फूलों की सजावट”। आलारिप्पू की खासियत यह है, कि इसमें नृत्य को कविता के माध्यम से प्रस्तुत होता है। यह नृत्य देखने में अति सुंदर लगता है और सभी लोगों को यह अपनी और आकर्षित करता है।
जातीस्वरम-
जातीस्वरम में कला ज्ञान को प्रमुखता से दर्शाया जाता है। इसके अलावा स्वर मालिका के प्रसंग के बारे में भी बताया जाता है। यह काफी प्रचलित माना जाता है।
सब्दम-
इस नृत्य को काफी शारीरिक कलाकृति होने के कारण प्रचलित माना जाता है। इसमें चकित करने वाले व सुंदरमय नृत्य करके भारतनाट्यम को प्रस्तुत करा जाता है। भारतनाट्यम के इस भाग को भी लोगों द्वारा अधिक पसंद किया जाता है।
वर्णम-
वर्णम भारतनाट्यम का चौथा भाग है। इसको भी काफी पसंद किया जाता है। इसमें वर्णों द्वारा नृत्य को काफी आकर्षक व सुंदर बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। नृत्य में भाव, ताल और राग तीनों को केंद्रित करके नृत्य को सुंदर बनाया जाता है।
पदम्-

इसमें सर्वप्रथम वंदना होती है। यह वंदना तेलुगु, तमिल, संस्कृत, भाषा के मिश्रण से बनी होती है। इससे यह होता है, कि नृत्य के अच्छा होने की गुणवत्ता का पता चलता है।
तिल्लाना- 
इसको भारतनाट्यम का अंतिम भाग कहा जा सकता है। इसमें विभिन्न प्रकार की कलाओं को प्रदर्शित कर नारी के सुंदरता को दिखाया जाता है। भारतनाट्यम का अंतिम भाग लोगों को काफी मनमोहक व सुंदर लगता है।
इस नृत्य की यह खासियत है, कि इसको करते समय पैरों में घुंघरू बांधना आवश्यक होता है। इस नृत्य को आप एक कलात्मक योग के रूप में देख सकते हैं। भारत की प्रसिद्ध रुकमणी देवी इस नृत्य की पहली कलाकार है।
