Harappa

क्या Harappa काल में हिंदू धर्म का अस्तित्व था?

by Divyansh Raghuwanshi
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Harappa लड़की की मूर्ति की तस्वीर मोहनजोदड़ो के खंडहर में मिली है, जो विश्व विख्यात है। यह लड़की अपना मुंह ऊपर की और किए हुए, बड़े ठाठ से खड़ी है, एक हाथ कमर पर रखे हुए हैं और दूसरा हाथ घुटनों के ऊपर रखे हुए हैं।  

पुरातत्व वेदों ने इसे “डांसिंग गर्ल” नाम दिया, तब से लोग इसे यही नाम से जानते हैं लेकिन इस तस्वीर को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता कि, यह लड़की नृत्य में निपुण है।

पुरातत्व वेदों ने यह माना कि, यह लड़की हिंदू मंदिरों एवं  राज दरबार की नृत्य कन्या जैसी थी। यह मूर्ति सिर्फ 11 सेंटीमीटर ऊंची है। कुछ साल पहले एक राजनीतिज्ञ की पत्नी को यह तस्वीर असलील लगी थी, इस वजह से उसने इससे डायरी या किताबों में छापने पर विरोध किया था।

कुछ समय पहले, पाकिस्तान ने भी उस पर अपना दावा किया था। कुछ लोगों ने इसे पार्वती नाम दिया। पार्वती का अर्थ है पर्वत की लड़की। पार्वती की कहानी पौराणिक काल में सबसे पहले ग्रंथों रामायण और महाभारत में पाई गई है। बौद्ध धर्म की शुरुआत 2500 साल पहले हुई। यह पौराणिक काल बौद्ध धर्म के बाद आया। 

Harappa के काल में वैदिक हिंदू धर्म को स्पष्ट रूप से धर्म का रूप देने से इस काल में त्याग की बौद्ध विचारधारा का विरोध किया गया था, यह लगभग 2000 साल पुरानी घटना है। Harappa के काल में “डांसिंग गर्ल” उससे कहीं अधिक पुरानी है, शायद 5000 साल पुरानी, इसलिए इसे पार्वती कहना या पार्वती मानना अनुचित है।

इतिहासकार बताते हैं कि, जो पुरातत्विक और शाब्दिक सबूतों को महत्व देते हैं लेकिन धार्मिक और राजनीतिक सबूतों को महत्व नहीं देते उनमें से कई इतिहासकारों का कहना है कि Harappa की सभ्यता वैदिक थी। इनमें से कई इतिहासकारों का कहना है कि पुराणों में लिखी जाने से पहले पार्वती की कहानी कई सदियों से मौखिक रूप से लोगों द्वारा बताई गई है।

वेद से यह पता चला

Dancing girl

Dancing girl

लेकिन वेद जो 3000 साल पुराने है इसमें पार्वती और शिव की कोई बात नहीं कही गई है। Harappa की सभ्यता को हिंदू साबित करने का एक और तर्क भी दिया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि हड़प्पा के शहरों के तंत्र हम तक पहुंचाते हैं अर्थात वेदों के साथ-साथ हिंदू धर्म की दो प्रमुख धाराओं में से वह एक प्रमुख धारा है। इसमें हड़प्पा के शहरों से मिली मिट्टी की मोहर पर तांत्रिक परंपराओं की तस्वीरें भी देखी गई हैं।

एक मोहर पर तस्वीर आदिम शिव जैसी दिखती है, “डांसिंग गर्ल” की तस्वीर आदिम पार्वती जैसी है। ऐसी मान्यता है, लेकिन एक बैरागी से विवाह कर उसे गृहस्थ बनाने वाली राजकुमारी की कहानी यहां से उभरी होगी।

कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि इस्लाम और यूरोपीय शासन द्वारा विध्वंस किए जाने पर पहले एक परिपूर्ण पूर्ण रूप से संगठित हिंदू धर्म भारत के अस्तित्व में था। हिंदू धर्म में पार्वती और शिव का नाम हमेशा से अस्तित्व में रहा है, लेकिन कुछ लोग पुरातात्विक और साहित्यिक सबूतों को अधिक महत्व देते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि, हिंदू धर्म पुरातत्व और शाब्दिक सबूतों को महत्व देता है। कुछ लोग मानते हैं कि हिंदू धर्म सदैव दूसरी सभ्यता के प्रभाव के कारण बदलता रहा है। हिंदू धर्म में पार्वती “डांसिंग गर्ल” कई सदियों बाद आए, लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो पुरातात्विक और साहित्यिक सबूतों को भी सही मानते हैं।

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