ऑस्ट्रेलिया में मौत के घाट उतारे गए 5000 ऊंट, 10000 ऊंटों को मारने का लक्ष्य

by Vinay Kumar
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हम इंसान कितने दयाहीन हो सकते हैं इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता, बीते काफी समय से हम प्राकृतिक संसाधनो का इस्तेमाल तो कर ही रहे हैं और संसाधनो के अबाव में भी हम खुद की गलतियों को सुधारने के बजाय कुछ ओर ही करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसी ही एक भयभीत कर देने वाली खबर आ रही है ऑस्ट्रेलिया से, जहां 10000 ऊंटों को गोली मारे के आदेश दिए गए हैं। ऊंटो की गलती इतनी है कि वह अपनी प्यास बुझा रहे हैं। दरअसल यह मामला है दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया का यह इलाका सुखे की चपेट में है और ऊंटों के अधिका पानी पीने की वजह से यहां ऊंटो को मौत के घाट उतारा जा रहा है। अब तक इस आदेश के बाद लगभग 5000 ऊंटो की गोली मार कर हत्या कर दी गई है।

आदिवासियों का है यह मत

दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में बसने वाले आदिवासियों का इस पर अलग अलग मत दिखाई दे रहा है। इनका यह कहना है कि सुखे के कारण यह ग्रामीण इलाको की तरफ बढ़ रहे हैं और यह बचा हुआ पानी और खाने की वस्तुओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिसके चलते इन्हे मार देने का ही विकल्प शेष रह गया है।

10 लाख है ऊंटो की संख्या

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार ऊंटों को 1860 के दशक में महाद्वीपो की खोज के लिए लाया गया था। जिसके बाद से ही भारत से ऑस्ट्रेलिया लगभग 20000 ऊंटो को भेजा गया। अब ऊंटों की संख्या ही ऑस्ट्रेलिया के लिए सिर दर्द का कारण बन गई है। आज ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा ऊंट पाए जाते हैं आज के समय में इनकी संख्या लगभग 10 लाख तक पहुंच गई है।

जल स्रोत हो रहे हैं प्रदूषित

ऊंटो की इस तरह हत्या को लेकर यूं तो बहुत से अंदाजे लगाए जा रहे थे, मगर इसकी असली वजह अब सामने आई है। प्रशासन की ओर से यह हवाला दिया गया है कि सूखा पड़ने के बाद से बाकी वन्य जानवरों बिलकुल ठीक हैं लेकिन जंगली ऊंट पानी की तलाश में अक्सर इधर उधर निकल जाते हैं, बहुत से ऊंटों की मौत किसी कुए में गिरने से हो जाती है। जिसकी वजह से जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं। APY अधिकारी ने बताया है कि अब तक करीब 5000 ऊंटों को मार दिया गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया प्रशासन ने भी सूखाग्रस्त इलाको में 10000 ऊंटो को मारने के आदेश जारी कर दिए है।

पानी बचाने के लिए की जा रही है हत्या

वहीं दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के उत्तर पश्चिम के जनरल मैनेजर रिर्चड किंग ने कहा है कि इस इलाके में रहने वाले लोगों की संख्या करीब 2300 है। यहां सूखे के चलते हालात बहुत गंभीर हो गए हैं. ऐसे में हम यह भी जानते हैं कि पशुओ की चिंता करने वाले लोगो की सोच की भी हम सराहना करते हैं। लेकिन मानव के पास वैसे भी जल स्रोतो की खासी कमी हो गई है, वहीं जंगली ऊंटों को भारी मात्रा में पानी पीना बहुत बड़ संकट बन कर ऊभर आया है और इसी समस्या से निपटने के लिए हमे यह कदम उठाना पड़ा है।

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